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Samasya Samadhan / Q&A
Published: 01 Jun 2025 | Category: SUBSTANTIVE LAWS | Subcategory: OTHERS
Problem / Question
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के अंतर्गत अधिहरित किये गये वाहन के संबंध में पारित अधिहरण आदेश विषयक अद्यतन विधिक स्थिति क्या है? / What is the latest legal position regarding the confiscation order passed in respect of the vehicle confiscated under the Madhya Pradesh Excise Act, 1915?
Solution / Resolution

माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने न्याय दृष्टांत रामलाल झारिया विरूद्ध मध्य प्रदेश राज्य (निर्णय दिनांक 21.04.2025, रिट पिटीशन क्रं. 6542/2025) में माननीय उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांत मध्यप्रदेश राज्य विरूद्ध मधुकर राव, (2008) 14 एस सी सी 624, में प्रतिपादित विधि के आलोक में म.प्र. आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 47-क को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित किया है कि कलेक्टर के समक्ष की जा रही अधिहरण कार्यवाही में अधिनियम की धारा 47-क, वाहन मालिक को यह सिद्ध करने का कोई अवसर नहीं देती है कि वाहन उसके संज्ञान या सहमति के बिना प्रयोग हुआ, जो कि उसके मूलभूत अधिकारों एवं संविधान के अनुच्छेद 300 में प्रतिपादित संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है।

उपरोक्त निर्णय के अनुसार किसी आपराधिक प्रकरण के विचारण के दौरान कलेक्टर द्वारा अधिहरण का आदेश पारित नही किया जा सकता है, क्योंकि उक्त आदेश पारित करने का अधिकार सिर्फ उस न्यायालय को प्राप्त होगा जो कि उस अपराध का विचारण कर रहा है, जैसा कि उक्त अधिनियम की धारा 46 और 47 में वर्णित है। परिणामस्वरूप, अधिनियम की धारा 47-क अब उन सभी मामलों में अप्रभावी हो जाती है जिनमें अब तक अधिहरण का आदेश पारित नहीं किया गया है। उक्त निर्णय के अनुसार निम्नलिखित विधिक स्थिति स्पष्ट होती है -

अ. यदि निर्णय दिनांक तक अधिहरण का आदेश पारित नहीं हुआ है, तो अब अधिहरण का आदेश कलेक्टर द्वारा नहीं अपितु आपराधिक न्यायालय द्वारा ही निर्णय के प्रक्रम पर किया जाएगा।

ब. यदि अधिहरण का आदेश पारित हो चुका है परन्तु आदेश के विरूद्ध अपील, पुनरीक्षण, धारा 482 द.प्र.सं. के अंतर्गत याचिका या रिट आदि के रूप में लंबित है, तो इस निर्णय का लाभ ऐसे मामले में भी प्राप्त होगा।

स. जहाँ अधिहरण का आदेश या अधिहरण के विरूद्ध की गई अपील का आदेश, माननीय उच्च न्यायालय के इस निर्णय दिनांक के पूर्व ही पारित हो चुका है, वहां इस निर्णय का लाभ केवल तभी प्राप्त होगा जब इसे चुनौती देने के लिए वैधानिक सीमा निर्णय दिनांक को समाप्त नहीं हुई है और यदि पुनरीक्षण में पारित आदेश इस निर्णय दिनांक से तीन माह के भीतर पारित किया गया है तब भी इस निर्णय का लाभ रिट याचिका/धारा 482 भ.द.सं. में उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती देते समय लाभ होगा।

द. ऐसे मामले जहाँ अधिहरण के आदेश को चुनौती नहीं दी गई, या चुनौती दी गई परन्तु वह विफल रही है और अब कोई मामला लंबित नहीं है, या चुनौती देने का समय समाप्त हो चुका है तब ऐसे मामलों में अधिहरण आदेश अब अंतिम माना जाएगा।